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जीवन की कहानी

डॉ. दिलीप कुमार सिंह पद्मश्री से हुए सम्मानित

लाखों गरीबों का मुफ्त में इलाज करने वाले ‘गॉड फादर’ के नाम से मशहूर (Dr. Dilip Kumar Singh) डॉ. दिलीप कुमार सिंह पद्मश्री से हुए सम्मानित, इनकी सेवाभाव को देख आप भी हो जाएंगे हैरान

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लाखों गरीबों का मुफ्त में इलाज करने वाले ‘गॉड फादर’ के नाम से मशहूर (Dr. Dilip Kumar Singh) डॉ. दिलीप कुमार सिंह पद्मश्री से हुए सम्मानित, इनकी सेवाभाव को देख आप भी हो जाएंगे हैरान

डॉक्टर को भगवान का रूप ऐसे ही नहीं कहा जाता। इस दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जो बिना किसी स्वार्थ के अपना संपूर्ण जीवन लोगों की सेवा करने में लगा देते हैं। इन्हीं महान लोगों में से एक हैं बिहार के भागलपुर के रहने वाले डॉ. दिलीप कुमार सिंह। जिन्हें गॉड फादर भी कहा जाता है। जिस समय में ज्यादातर डॉक्टर शहर में रहकर प्रैक्टिस करना पसंद करते हैं उस समय दिलीप कुमार सिंह ने अपने गांव को ही अपने कार्यस्थल के रूप में चुना।

93 साल के हो चुके डॉ. दिलीप कुमार सिंह आज भी मरीजों का ईलाज करते हैं। वो लाखों मरीजों का मुफ्त में ईलाज कर, उनकी सहायता कर चुके हैं। यही कारण है कि गरीबों और बेसहारा लोगों के मसीहा कहे जाने वाले डॉ. दिलीप कुमार सिंह को भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च सम्मान में से एक पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है।

डॉ. दिलीप कुमार सिहं के लिए गॉड फादर कहलाने के पीछे एक प्रेरणादायक कहानी छिपी है। आइए जानते हैं उनके जीवन का संघर्ष और सफलता का सफर।

Dr. Dilip Kumar Singh ने 93 साल की उम्र में भी नहीं छोड़ा मरीजों को देखना

भागलपुर में पीरपैंती प्रखंड के डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह अपने काम के प्रति कितने ईमानदार है इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि 93 साल की उम्र में भी वो लोगों की सेवा करते हैं। 93 वर्षीय डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने तकरीबन 68 साल में लाखों गरीबों का मुफ्त ईलाज किया है। आज भी वह मरीजों को देखते हैं।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भागलपुर (IMA Bhagalpur) के ‘गॉड फादर’ रहे डॉ. सिंह ने गरीबों और बेसहारों को जीवनदान देने के लिए डॉक्टरी के पेशे को अपनाया था।

ये पढ़िए: खान सर पटना वाले की प्रेणादायक जीवन की कहानी

पोलियों के ईलाज में भी ने दिया है अहम योगदान

26 जून 1926 को बांका में जन्में डॉ दिलीप कुमार सिंह की शुरुआती पढ़ाई पीरपैंती से ही हुई थी। हाईस्कूल की पढ़ाई उन्होंने भागलपुर से की। फिर पटना मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई 1952 में पूरी की थी। इसके बाद इंग्लैंड से इन्होंने डीटीएम एंड एच किया है। 1953 में भागलपुर के कई प्रखंडों में कोलरा फैला तो इसके इलाज में ये काफी एक्टिव रहे। देश में पोलियो के इलाज को लेकर भी इनका अहम योगदान माना जाता है। गांव में दो पोलियो के मरीज मिलने के बाद उन्होंने अपने खर्च पर विदेश से ग्यारह सौ फाइल पोलियो की दवा मंगाई। फिर गांव-गांव में घूमकर बच्चों को दवा पिलाई।

हालांकि, उनके इस जज्बे को देखकर आइएमए बुक ऑफ रिकार्ड और लिमका बुक ऑफ रिकार्ड में उनका नाम दर्ज हुआ। गांव में बिजली नहीं रहने के कारण बड़ी समस्या खड़ी हो रही थी, लेकिन गरीब लोगों का सस्ता इलाज और जिनके पास रुपये नहीं थे उनका मुफ्त में इलाज करने का काम शुरू किया।

संघर्ष में भी नहीं मानी हार

डॉ. दिलीप सिंह केवल चिकित्सा के क्षेत्र में ही अपने द्वारा किए गए कार्यों के लिए प्रसिद्ध नहीं है बल्कि अपने हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान वो आजादी की लड़ाई में भी शामिल हुए थे। इंटर की पढ़ाई के दौरान उनकी उम्र करीब 19 साल की थी। उस समय मां का साथ छूट गया। वहीं, जब 27 साल के हुए तो पिता का भी साया उठ गया। परिवार में बड़ा होने के नाते परिवार की सारी जिम्मेदारियां उन्हीं के कंधों पर आ गईं, लेकिन उन्होंने अपने छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी उठाने के साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। खुद को मुकाम पर पहुंचाया और भाई और बहनों को को भी पढ़ा-लिखाकर अच्छा इंसान बनाया और, लोगों का उपचार भी उन्होंने जारी रखा।

देश की सेवा करने के लिए छोड़ दी अमेरिका की नौकरी

डॉ. दिलीप कुमार सिंह (Dr. Dilip Kumar Singh) ने 1952 में पटना मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई खत्म करने के बाद अमेरिका भी गए। वहां कुछ दिनों तक उन्होंने नौकरी की, लेकिन उनका मन वहां नहीं लगा। क्योंकि उनके मन में अपने देश की सेवा करने का जुनून सवार था। देश की सेवा करने के जज्बे ने उन्हें वहां से लौटने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद वह सीधे अपने गांव पीरपैंती लौट आए और गरीबों का इलाज करना शुरू कर दिया।

हालांकि, जिस दौर में उन्होंने इलाज करना शुरू किया था, उस समय छुआछूत जैसी सामाजिक बुराई चरम पर थी। दौर वो था जब न सड़क थी, न बिजली थी और न ही टेलीफोन की सेवा। जिस किसी गांव से मरीज की सूचना आती थी तो वे उस गांव में जाकर इलाज करते थे। यदि रात हो गई तो दिया जलाकर इलाज करते थे।

ये भी पढ़िए: (गणितज्ञ) वशिष्ठ नारायण सिंह की प्रेणादायक जीवन की कहानी और कुछ रोचक बातें

सरकार ने किया पद्मश्री सम्मान से सम्मानित

चिकित्सीय सेवा में बेहतर कार्य के लिए भारत सरकार ने Dr. Dilip Kumar Singh को पद्मश्री (Padma Shri) सम्मान से नवाजा है। 93 वर्षीय डॉ. दिलीप ने हमेशा गरीबों और बेसहारा लोगों की जिंदगी रोशन करने का ही काम किया। डॉ. दिलीप कुमार सिंह को लाइफ मेंबर आफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन एंड लेप्रोसी फाउडेशन, वर्धा, डेलीगेट ऑफ वल्र्ड मेडिकल एसेम्बली, म्यूनिक, जर्मनी, सिस्टर कौरोल हस्स अवार्ड एवं पंचशील शिरोमणि अवार्ड सहित कई पुरस्कार उन्हें मिल चुके हैं।

डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने अपने कार्यों से लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई है। अपने काम के प्रति उनकी ईमानदारी और प्रतिबद्धता आज लाखों लोगों के लिए उन्हें प्रेरणास्त्रोत (Inspiration) बनाती है। डॉ. दिलीप कुमार सिंह की सफलता की कहानी (Success Story of Dr. Dilip Kumar Singh) सही मायने में लाखों लोगों को प्रेरित करती है।

आपको ये भी पढ़ना चाहिए: बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार की जीवन की कहानी और कुछ अनकहे-अनसुने बातें

आपको ये “बिहार के मशहूर डॉ. दिलीप कुमार सिंह की जीवन की कहानी आपको कैसी लगी ये निचे कमेंट करके जरूर बताएं। और BiharJournal.com पर किस तरह के लेख पढ़ना चाहते हैं, अपना राय जरूर दें।

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जीवन की कहानी

Vashishtha Narayan Singh Biography – वशिष्ठ नारायण सिंह की जीवनी और उनसे जुडी रोचक जानकारियां

मशहूर वशिष्ठ नारायण सिंह की जीवनी और उनसे जुडी रोचक जानकारियां | Indian Mathematician Vashishtha Narayan Singh Biography (Birth, Education, Wife, Life History), and Interesting Fact in Hindi.

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Vashishtha Narayan Singh Biography Hindi

विश्व के महान गणितज्ञों में बिहार के डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह का भी नाम शामिल हैं. बेहद गरीब होने के बावजूद कभी गरीबी का प्रभाव इनकी प्रतिभा पर नहीं पड़ा। तो चलिए आज के इस लेख में हम जानेंगे विश्व के महान वैज्ञानिक “Vashishtha Narayan Singh Biography” जानेंगे। और साथ ही कुछ “Known Facts About Vashishtha Narayan Singh” भी जानेंगे।

Vashishtha Narayan Singh Biography Hindi

डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह का जन्म बिहार के भोजपुर जिले के बसंतपुर गाँव में 2 अप्रैल 1942 को हुआ था. इनका परिवार आर्थिक रूप से गरीब बहुत ही था. इनके पिताजी पुलिस विभाग में कार्य करते थे. बचपन से वशिष्ठ नारायण सिंह में असाधारण प्रतिभा थी. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव में ही पूरी किया।

साल 1962 में इन्होनें नेत्राहत स्कूल से 10 वीं की परीक्षा में पूरे बिहार में टॉप किया. और उसके बाद साइंस कॉलेज से इन्टरमीडिएट की परीक्षा में भी पूरे बिहार में भी टॉप किया। आपको बता दे की, जब ये पटना साइंस कॉलेज (Patna Science College) में पढाई कर रह थे, तब उन्होंने अपने शिक्षकों को गलत पढ़ाने के कारण बीच में ही टोक दिया करते थे।

और जब ये बात कॉलेज के प्रिंसिपल को पता चली तो इनकी अलग से परीक्षा ली गयी जिसमे उन्होंने सारे एकेडमिक रिकॉर्ड को तोड़ दिए. पढाई के दौरान उनकी मुलाकात अमेरिका से पटना आये प्रोफ़ेसर केली (John L. Kelley) से हुई. जिसके बाद वे 1963 में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (University of California) में शोध के लिए चले गए

वर्ष 1969 में अपनी पी.एच.डी (PhD) पूरी करने के साथ-साथ वाशिंगटन में गणित के प्रोफेसर के रूप में बने. उसके बाद, इन्होने नासा (NASA) में भी काम किया। लेकिन इनकी अपनी मातृभूमि की मोह ने अपने हिंदुस्तान आने पर मजबूर किया। और 1971 में ये भारत लौट आये। भारत आने के बाद उन्होंने आई.आई.टी. कानपूर और भारतीय सांख्यकीय संस्थान, कलकत्ता में काम किया.

सम्बंधित लेख: Nitish Kumar Biography – नीतीश कुमार की जीवनी – शिक्षा और राजनीति सफर

Vashishtha Narayan Singh Wiki/ Bio

Real Name: Vashishtha Narayan Singh
Nickname:Vaigyanik Ji (वैज्ञानिक जी)
Profession:Mathematician

Vashishtha Narayan Singh Personal Life

Date of Birth:2 April 1942
Birth Place (जन्म स्थान):बसंतपुर गाँव (भोजपुर)
Age (As in 2019):77 Years
Caste (कास्ट):Rajput (राजपूत)
School:Netarhat Vidyalaya, Jharkhand
College/University:Patna Science College, Patna, Bihar
The University of California, USA
Educational Qualification:Ph.D. in Reproducing Kernels and Operators with a Cyclic Vector

Family, Affairs, and More

Marital Status:Divorced
Marriage Year:1973
Wife/Spouse:Father- Late Lal Bahadur Singh (Constable in Bihar Police)
Mother- Lahaso Devi
Siblings:Brother- Ayodhya Singh, Dasrath Singh

इसे भी पढ़े: Khan Sir Patna Biography – खान सर की जीवन परिचय – Khan Sir Wiki

वशिष्ठ नारायण सिंह की कुछ अनदेखी तस्वीरें – Unseen pictures of Vashishtha Narayan Singh

वशिष्ठ नारायण सिंह से जुडी 5 रोचक जानकारी – 5 Interesting Fact About Vashishtha Narayan Singh

  1. Vashishtha Narayan Singh ने अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्ष के नियम और गौस की थ्योरी को चुनौती दिया था. लेकिन मानसिक बीमारी की वजह से कुछ भी साबित नहीं कर पाए.
  2. अपोलो मिशन (Apollo Mission) के दौरान वशिष्ट जी नासा में मौजूद थे तभी गिनती करने वाले कंप्यूटर में खराबी आ गयी थी. और उन्होंने ऊँगली पर गिनती करना शुरू कर दी थी. बाद में अपोलो मिशन में मौजूद वैज्ञानिकों ने उनकी गिनती को सही माना था लेकिन इस बात की आधिकारिक पुष्टि कहीं मौजूद नहीं हैं।
  3. जब वशिष्ठ नारायण जी को विदेश में शोध करने का मौका मिला था। तब उन्होंने अपने ग्रेजुएशन के तीन साल के कोर्स को महज एक साल में ही पूरा कर लिया था।
  4. नासा (NASA) को जब इनकी प्रतिभा का पता चला तो उन्हे न्यूयॉर्क में गाड़ी, बंगला और एक अच्छी सैलरी देने का प्रस्ताव रखा था। जिसे वशिष्ठ जी ने देश की सेवा करने के उद्देश्य से उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।
  5. अमेरिका में आज भी वशिष्ठ नारायण जी के शोध किये हुए विषयों को पढ़ाया जाता हैं।

Conclusion – निष्कर्ष

इस “Vashishtha Narayan Singh Biography – वशिष्ठ नारायण सिंह की जीवनी और उनसे जुडी रोचक जानकारियां” लेख को लिखने के लिए विकिपीडिया  की मदद लिया गया है, इस लेख में अगर कही पर भी आपको गड़बड़ नजर आ रही हैं तो निचे कमेंट में हमे बता सकते हैं हम उसे अपडेट करने की प्रयाश करेंगे।

हमें आशा हैं की यह Vashishtha Narayan Singh Biography Hindi – वशिष्ठ नारायण सिंह की जीवनी लेख आपको पसंद आया होगा। इस लेख को अपने सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करे। साथ ही आप हमसे Instagram और Facebook पर जुड़ सकते हैं।

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Khan Sir Patna Biography – खान सर की जीवन परिचय – Khan Sir Wiki

Khan Sir Patna के बारे में जितना बताया जाये उतना ही कम होगा, अगर आप अभी भी खान सर के बारे में यानि “Khan Sir Biography”, “Khan Sir Wikipedia”, “Khan Sir Age, Qualification” नहीं जानते हैं तो इस लेख में आप खान सर की जीवनी के बारे में पढ़ सकते हैं।

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Khan Sir Wikipedia Hindi

Khan Sir Patna के बारे में जितना बताया जाये उतना ही कम होगा, क्यूंकि Khan Sir को बिहार के वो हर छात्र जनता है जो पढाई को खेल-कूद या फिर मनोरंजन के भाषा में पढ़ना और सीखना चाहता हैं। और अगर आप अभी भी खान सर के बारे में यानि “Khan Sir Biography“, “Khan Sir Wikipedia“, “Khan Sir Age, Qualification” नहीं जानते हैं तो इस लेख में आप खान सर की जीवनी के बारे में पढ़ सकते हैं। इसके पहले हमने (Nitish Kumar Biography – नीतीश कुमार की जीवनी – शिक्षा और राजनीति सफर) के बारे में लिखा हैं आप चाहे तो इसे पढ़ सकते हैं।

क्या आपको पता हैं? की खान सर को उनके चाहने वाले लोग भारत का दूसरा डॉ. अब्दुल कलाम के नाम से पुकारते हैं।

जरूर पढ़े: बिहार पर 5 सबसे लोकप्रिय कविताएं

Khan Sir Patna Biography – खान सर की जीवनी

Khan Sir का पूरा नाम फैजल खान (Faizal Khan) है, और उनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता एक सेना अधिकारी थे, जो की अब रिटायर हो चुके हैं और उनकी माँ एक गृहणी हैं। उनका एक बड़ा भाई है जो सेना में कमांडो है। खान सर देश की सेवा करना चाहते थे और हमेशा अपना कुछ ज्ञान सभी लोगों को देना चाहते थे।

खान सर को बचपन से ही पढ़ने में मन लगता था और उनको लगभग सभी विषयों में रूचि थी। वो पढाई के मामला में काफी तेज बिद्यार्थी थे। अपनी पढाई पूरी करने के साथ-साथ उन्होंने NDA परीक्षा पास किया लेकिन उनके लिए दुर्भाग्य की बात ये थी की वे चयनित नहीं हुए।

Khan Sir Patna Career

उसके बाद, उन्होंने पटना में एक कोचिंग सेंटर और “Khan GS Research Center” YouTube Channel ऑफलाइन और ऑनलाइन सभी छात्रों को पढ़ाना शुरू किया।

शुरू में, उनके कोचिंग संस्थान में छात्र बहुत ही कम पढ़ने आते थे, लेकिन खान सर के पढ़ाने के तरीकों को विद्यार्थियों ने बहुत पसंद किया, और उसके बाद, उनकी कोचिंग बहुत तेजी से बढ़ी। और अब उनके के कोचिंग संसथान में एक बार में लगभग 2000 से भी अधिक बच्चे पढ़ने आते हैं, और कुछ लोग जगह नहीं होने के कारण घंटों खड़े रहकर भी पढ़ लेते हैं।

बिहार में हुए Lockdown की वजह से उन्होंने ज्यादा ऑनलाइन क्लास को बढ़ावा दिया और अब YouTube और Mobile App पर ऑनलाइन क्लास पढ़ा रहे हैं।

Youtube पर आपको पढ़ाने वाले बहुत से टीचर मिलेंगे, लेकिन खान सर का पढ़ाने का अंदाज कुछ अलग और नया हैं, ये Khan Sir GS Research Center के संस्थापक और निदेशक हैं, जो, की बिहार की राजधानी पटना की सबसे बड़ी कोचिंग माइन हैं।

आपको बता दे की, खान सर के पढ़ाने का इस नए अंदाज से विद्यार्थी इतने ख़ुश हुये की इनका यूट्यूब चैनल कुछ ही महीनों में इतना बड़ा और प्रसिद्ध हो गया की उनके Khan Sir Patna YouTube Channel पर 9.25 मिलियन Subscribers हो गए हैं।

सम्बंधित लेख: Neelam Giri Biography – भोजपुरी अभिनेत्री नीलम गिरी – Biography in Hindi

Khan Sir Wiki, Real Name and Profession

Khan Sir Real Name:Faizal Khan
Nickname:Khan Sir
Profession:Teacher
Famous For:Teaching Style

Khan Sir Physical Status

Khan Sir Age, Height, Weight & more…

Age:28 Years
Height:in Feet-Inches 5’5”
Weight (approx.):In Kilograms- 62 kg
Eye Colour:Black
Hair Colour:Black

Khan Sir Patna Personal Life or Information

Date of Birth:December 1993
Birth Place:Gorakhpur, U.P
Hometown:Patna, Bihar
Religion:Muslim
Nationality:Indian
College Name:Allahabad University
Khan Sir Patna Qualifications:B.sc, M.sc

Khan Sir Career/ Income

Source Of Income:Offline Coaching, YouTube, and Mobile App
Famous For His:YouTube
Khan Sir Monthly IncomeEstimated 1-5 Lac from YouTube Channel.

इस लेख को पढ़े: बिहार के मुख्यमंत्री के बारे में जानेंगे तो हैरान हो जायेंगे।

Khan Sir Income के बारे में ऐसे दर्जनों वीडियो और आर्टिकल मिल जायेंगे, जो आपको बताते हैं की Khan Sir YouTube से महीने का 10 लाख से भी ज्यादा कमाते हैं। लेकिन बातें अफवाह हो सकती हैं, आपको बता दे की जब खान सर के यूट्यूब चैनल पर 1 Million Subscriber थे तब उनका अनुमानित आय 1 लाख तक थीं। अब आप इसी बात से अनुमान लगा सकते हैं की अभी खान सर के यूट्यूब चैनल पर 6.6 Million Subscriber है तो सर कितना कमाते होंगे।

खान सर अपने ऑफलाइन कोचिंग से भी लाखों कमाते है, जो की सबसे अच्छी और बड़ी बात ये हैं की अपने कोचिंग से कमाया हुआ अधिकांश हिस्सा अनाथ आश्रम, गौशाला और NGO आदि में दान कर देते हैं।

Khan Sir Patna SocialMedia Handles

YouTube:Click Here
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अगला लेख पढ़े : Poem on Bihar: बिहार पर 5 बेहतरीन कविता जरूर पढ़े।

5 Most Common Questions About Khan Sir Patna

Q.1 Who is GS Khan? – खान सर कौन हैं?

ANS. खान सर बिहार के ऐसे शिक्षक हैं जो शिक्षा पद्धति में सबसे अधिक बोल-चाल और मनोरंजन की भाषा में पढ़ाते हैं। Khan Sir Patna में Khan GS Research Center Patna के नाम से कोचिंग सेंटर चलाते है।

Q.2 Khan Sir Patna Ka Real Name Kya Hai?

ANS. खान सर का रियल नाम फैज़ल खान (Faizal Khan) हैं।

Q.3 Khan Sir Patna Ki Age Kitni Hai?

ANS. Khan Sir Patna की Age 28 साल हैं।

Q.4 Khan Sir Patna Ki Income Kitni Hai?

ANS. अगर Khan Sir Income Source की बात करें तो कोचिंग क्लास, यूट्यूब चैनल और मोबाइल ऐप्प से कमाई करते हैं, खान सर यूट्यूब से अनुमानित रूप से 1 लाख से लेकर 5 लाख तक कमा सकते हैं। इस बारे में अभी तक अधिक जानकरी नहीं हैं।

Q.5 Khan Sir Ki Coaching Ka Kya Naam Hai? Aur Kaha Hai?

ANS. Khan Sir की कोचिंग संस्थान (Coaching Institue) बिहार की बहुत बड़ी कोचिंग संस्थान हैं जिसका नाम Khan GS Research Center हैं। और इनके कोचिंग का Adress:– Musallahpur Hat, Chak Musallahpur, Koiritola, Patna, Bihar 800004 हैं।

Conclusion – निष्कर्ष

Khan Sir Patna Biography – खान सर की जीवन से जुडी यह लेख आपको कैसा लगा आप हमें कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं। और साथ जिनको खान सर के बारे में नहीं पता हैं आप उसे यह लेख WhatsApp, Facebook और Instagram की मदद से शेयर करें। इस लेख को पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…!

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Nitish Kumar Biography – नीतीश कुमार की जीवनी – शिक्षा और राजनीति सफर

Nitish Kumar Biography in Hindi – नीतीश कुमार की जीवनी से लेकर राजनितिक तक का सफर – The BiharJournal

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Nitish Kumar Biography

नीतीश कुमार (Nitish Kumar) बिहार के मुख्यमंत्री है, जिनका नाम देश के दिग्गज नेताओं में लिया जाता है। इस लेख में हम नीतीश कुमार की जीवनी (Nitish Kumar Biography) और जीवन परिचय से लेकर राजनितिक सफर तक के बारे में जानेंगे, इस लेख के पहले हमने “Neelam Giri Biography – भोजपुरी अभिनेत्री नीलम गिरी” लिखा था आप चाहे तो इसे भी पढ़ सकते हैं, Nitish Kumar Biography को पूरा पढ़े।


Nitish Kumar Biography – नीतीश कुमार की जीवनी

साल 2000 में Nitish Kumar पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री चुने गए थे। नीतीश कुमार हमारे देश के रेल मंत्री के रूप में कई अहम कार्य किए। तब से उन्होंने बिहार में विकास के लिए ढेरों काम किए। नीतीश कुमार राजनीति में आने से पहले बिहार राज्य के बिजली बोर्ड में नौकरी करते थे, लेकिन जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से प्रेरित होकर नितीश राजनीति में कूद पड़े।


नीतीश कुमार का जन्म – Birth of Nitish Kumar

आज़ादी के चार साल बाद नितीश कुमार का जन्म हुआ था। 1 मई 1951 को बिहार के नालंदा जिले में स्थित बख्तियारपुर में उनका जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम कबीर राम लखन सिंह और माता का नाम परमेश्वरी देवी था। नितीश के पिता भारत के स्वतंत्रता सेनानी थे। साथ ही वे आयुर्वेद के बड़े जानकार थे।

नीतीश कुमार की कुछ अनदेखी तस्वीरें – Unseen pictures of Nitish Kumar

नितीश कुमार की कुछ अनदेखी तस्वीरें जो सायद आपने इसके पहले कभी नहीं देखा होगा। Hmm, तो क्या आप नीतीश कुमार की निजी जीवन (Nitish Kumar Lifestyle) के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं ? हाँ, तो निचे पढ़े।


नीतीश कुमार की निजी जीवन – Nitish Kumar’s personal life

नितीश कुमार का दिल जिस टीचर पर आया था, उसका नाम मंजू कुमारी सिंहा था। मंजू कुमारी पटना में एक स्कूल टीचर थीं। दोनों के प्यार का परवान इस कदर चढ़ा कि 22 फरवरी 1973 में कोर्ट मैरिज कर ली। नितीश कुमार OBC समुदाय से आते है। वही उनकी पत्नी जेनरल वर्ग से आती थी। नितीश की पत्नी का 2007 में निधन हो गया था।

Physical Appearance

Height5′ 8″
Weight75 kg (Approx)
Eye ColorBrown
Hair ColorWhite

Nitish Kumar Favourite Things

Favorite Politician:Jaiprakash Narayan
Favorite Actor:Aamir Khan
Favorite Film: PK (2014)
Favorite Food: Butter Masala Dosa
Favorite Beverage: Tea

Nitish Kumar Salary & Net Worth

Salary: 2.15 Lacs INR per month
Net Worth:3.09 Crores INR

Nitish Kumar Address

1 Anne Marg, Sachiwalya, Patna, Bihar

सम्बंधित लेख: नीलम गिरी कौन हैं? – Neelam Giri Biography in Hindi


नीतीश कुमार की शिक्षा – Nitish kumar Education

नितीश कुमार बचपन से पढ़ाई में काफी तेज थे। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई बख्तियारपुर के श्री गणेश हाई स्कूल से की। उसके बाद वे पटना चले गए, और बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (NIT Patna) में दाखिला कराया। इस कॉलेज से 1972 में उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (Electrical engineering) की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूर्ण होने के बाद नितीश को  बिहार राज्य बिजली बोर्ड में नौकरी मिल गई।

कहा जाता है कि अंतिम समय में नितीश का उनकी पत्नी के साथ अच्छे संबंध नही रहे। वह कभी सीएम आवास पर कदम तक नही रखी। हालांकि खबर ये भी आई थी कि पत्नि के निधन पर नीतीश कुमार काफी रोय थे। खैर, नीतिश कुमार का एक बेटा है, जिनका नाम निशांत कुमार है। निशांत बीआईटी से ग्रेजुएट है।आगे आप नितीश कुमार की राजनितिक सफर के बारे में जानेंगे।


राजनीतिक सफर की शुरुआत – Political journey

नितीश कुमार बिजली बोर्ड में नौकरी करने के दौरान, साल 1974 में जयप्रकाश नारायण आंदोलन (JP movement) में शामिल हुए। इस आंदोलन के चलते उन्हे लगभग 1 साल तक जेल की सजा काटनी पड़ी। ऐसे समय में नितीश कुमार ने राजनीति में आने का फैसला किया। साल 1980 में वे पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) लड़े, लेकिन उन्हे हार का मुंह देखना पड़ा। दूसरी बार फिर लड़े और जीतकर साल 1985 में पहली बार बिहार विधानसभा पहुंचे।

बिहार विधानसभा पहुंचने के बाद नितीश कुमार साल 1987 में युवा लोकदल के अध्यक्ष बने। इसी दौरान वे विश्वनाथ प्रताप सिंह द्वारा केंद्र सरकार के विरूद्ध चलाए गए आंदोलन में शामिल हुए। साल 1989 में नितीश कुमार जनता दल यू (JDU) के महासचिव बने।


लोकसभा में नितीश कुमार का सफर

नितीश कुमार साल 1989 में जनता दल ( बिहार ) का महासचिव बने थे। इसी साल नीतीश 9वीं लोकसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद साल 1990 में अप्रैल से नवंबर तक पहली बार वीपी सिंह की सरकार में कृषि एवं सहकारी विभाग के केंद्रीय राज्य मंत्री बने रहे।

  • साल 1991 में नितीश कुमार दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इसी दौरान कांग्रेस को टक्कर देने के लिए जनता दल पार्टी का गठन हुआ। नितीश कुमार पार्टी के महासचिव और फिर संसद में उप-नेता बने।
  • 1996 के लोकसभा चुनाव में नितीश कुमार तीसरी बार लोकसभा के लिए चुने गए। तकरीबन दो सालों तक वे रक्षा समिति के सदस्य बने रहे। 1996 से 1998 तक रक्षा समिति के सदस्य भी रहे।
  • नितीश कुमार साल 1998 में 12वीं लोकसभा चुनाव जीते और चौथी बार लोकसभा के सदस्य बने। इस समय अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, जिसमे 1998 से 1999 तक नितीश कुमार रेल मंत्री बने रहे।
  • करीब एक साल बाद, 1999 में फिर से लोकसभा चुनाव हुए। और नितीश केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं भूतल परिवहन का पद संभाला। कुछ समय इस पद पर रहने के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया और कृषि मंत्रालय के मंत्री बने। नितीश कुमार तकरीबन 1 साल तक हमारे देश के कृषि मंत्री रहे।
  • साल 2001 में नितीश कुमार रेल मंत्री बने। नितीश के कार्यकाल के दौरान ही साल 2002 में गुजरात दंगा हुआ था। नितीश 2001 से 2004 तक केंद्रीय रेल मंत्री रहे और देश के लिए कई अहम फैसले लिए।
  • साल 2005 में एक बार फिर से बिहार का राज्यगद्दी यानि बिहार के मुख्य मंत्री बने।

मुख्यमंत्री के रूप में नितीश कुमार का सफर

नितीश के राजनीतिक करियर में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वे साल 2000 में बिहार के मुख्यमंत्री बने। हालांकि, 7 दिनों के भीतर ही उनकी सरकार गिर गई और उन्हे इस्तीफ़ा देना पड़ा।

  • उसके बाद, साल 2005 में बिहार विधानसभा का चुनाव हुआ। 15 साल से चल रही RJD सरकार को हराकर भाजपा के सपोर्ट से नितीश कुमार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।
  • पांच सालों में नितीश कुमार ने बिहार में इतना बढ़िया काम किया कि 2010 के विधानसभा चुनाव में उन्हे बंपर जीत मिली। नितीश कुमार तीसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। इस कार्यकाल के दौरान सपोर्ट पार्टी भाजपा (BJP) से नितीश का अन बन हो गया।
  • साल 2014 में लोकसभा चुनाव हुए। मोदी लहर में नितीश की पार्टी जनता दल यू बिहार में बुरी तरह हार हुई। नितीश ने अपनी हार की जिम्मेदारी लेते हुए, नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया। तब पार्टी की ओर से जितन राम मांझी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया।
  • साल 2015 में नितीश कुमार चौथी बार मुख्यमंत्री बने। हालांकि, यह चुनाव नितीश के लिए मुश्किल भरा रहा। नितीश ने मोदी लहर में भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस और आऱजेडी के साथ हाथ मिलाया। चुनाव में जनता ने नितीश के महा-गठबंधन को पसंद किया और भाजपा की हार हुई।
  • नितीश कुमार ने 26 जुलाई 2017 को एक बार फिर Chief Minister पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इसका कारण यह बताया गया कि उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, इसलिए नितीश कुमार तेजस्वी से उप-मुख्यमंत्री पद से हटने को कहा। लेकिन जब तेजस्वी ने ऐसा नही किया तो नितीश कुमार खुद ही सीएम से इस्तीफ़ा देकर महा-गठबंधन को तोड़ दिया।
  • इस्तीफ़े के कुछ घंटे बाद ही, नितीश कुमार फिर से भाजपा के साथ हो गए। विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर नितीश पांचवी बार मुख्यमंत्री बने। उनका कार्यकाल 2020 में खत्म होने के बाद है। बिहार में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, जिसमे एक बार फिर से नितीश ने बिहार की राज्यगद्दी को संभाला है।

Conclusion – निष्कर्ष

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