in ,

Bihar Hu Mai – बिहार हूँ मैं – बिहारवासियों के लिए समर्पित

Bihar Hu Mai - Hindi Poem

Bihar Hu Mai: एक बिहारी सब पर भारी ये कथन आपने कई बार सुना होगा। तो चलिए पेश है एक कविता जिसको पढ़ने के बाद बिहारी होने का गर्व होगा। ये कविता बिहार के लिए और बिहारवासियों के लिए समर्पित।

चाणक्य सा ज्ञानी हूं मै
जनक सा स्वाभिमानी हूँ मै
मांझी सा जिद्दी हूँ मै
बोधगया में सिद्धि हूँ मै
आर्यभट सा गणितज्ञ हूँ मैं
राजेंद्र प्रसाद सा राजनितज्ञ हूँ मैं
अशोक स्तंभ के शेर की दहाड़ हूँ मैं
अभी चल अधिक बिहार हूँ मैं


मिथिला सा मिठास हूँ मैं
वैशाली सा इतिहास हूँ मैं
सात शहीद का रक्त हूँ मैं
लोकनायक सा देश भक्त हूँ मैं
गुरु गोविन्द सा बलवान हूँ मैं
मैत्रई का अद्धभुत ज्ञान हूँ मैं
अपना वजूद लिए बरकरार हूँ मैं
अभी चल अधिक बिहार हूँ मैं


मगध सा सम्राज्य हूँ मैं
हिन्द के सर का ताज हूँ मैं
पटना सा प्यारा हूँ मैं
भोजपुरी सा आवारा हूँ मैं
शिक्षा केंद्र विक्रमशिला हूँ मैं
कोशी की विनाश लीला हूँ मैं
गणतंत्र का प्रथम प्रहार हूँ मैं
अभी चल अधिक बिहार हूँ मैं


छठ सा धार्मिक हूँ मैं
विद्यापति सा मार्मिक हूँ मैं
दिनकर सा कवि हूँ मैं
बुद्धा की पावन छवि हूँ मैं
शांति स्तूप सा मजबूत हूँ मैं
करोड़ो दिलों का एक परिवार हूँ मैं
अभी चल अधिक बिहार हूँ मैं


लेखक: अज्ञात

Bihar Hu Mai – बिहार हूँ मैं ये कविता आपको कैसा लगा और साथ ही कोई सवाल या सुझाव हो तो निचे कमेंट में जरूर बताएं।

अगर आप एक लेखक है तो बिहार जर्नल आपको अपनी रचनाएँ इस ब्लॉग पर लिखने का मौका देता है, आप अपनी लेख और रचनाएँ बिहार जर्नल के माध्यम से पुरे भारत वर्ष में शेयर कर सकते हैं ।

Written by साहित्य जर्नल

 हमारा प्रयास साहित्य के विभिन्न रूपों को साहित्य जर्नल के माध्यम से जनता तक पहुँचाना और नए उभरते लेखकों को प्रोत्साहित करना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GIPHY App Key not set. Please check settings

बिहार के राजगीर में बना भारत का दूसरा शीशे का ब्रिज, क्या है ख़ास?

Poem on Boy in Hindi

Best Poem on Boy in Hindi – लड़कों पर हिंदी कविता