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है ज़रूरी मेरी ज़िन्दगी के लिए – अंकित मौर्या

Ankit Maurya Gazals

है ज़रूरी मेरी ज़िन्दगी के लिए
लौट आओ घड़ी दो घड़ी के लिए

तेरे जाने से ऐसी हुई तीरगी
दिल जलाना पड़ा रौशनी के लिए

हमने देखी है उनकी भी रंगीनियां
वो जो मशहूर हैं सादगी के लिए

जान जाती है यूं तो जुदाई में पर
हम जुदा होंगे तेरी खुशी के लिए

राह तकती हैं मेरी भी नदियां कई
ख़ुद को प्यासा रखा इक नदी के लिए

हौसला है तो लड़ ज़िन्दगी से ऐ दोस्त
बुज़दिली चाहिए ख़ुदकुशी के लिए

Written by अंकित मौर्या

अंकित मौर्या बिहार के शौर्य भूमि भोजपुर जिले के बनाही गांव से आते हैं तथा आरा शहर में पले-बढ़े हैं। वर्तमान में वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा से स्नातक कर रहे हैं। वही से 'राहत इंदौरी' और 'कुमार विश्वास' जैसे पुरोधाओं को प्रत्यक्ष सुनकर इनका रुझान गीत-ग़ज़लों में हुआ और आज स्वयं इस क्षेत्र में बिहार का नाम रौशन कर रहे हैं।

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