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जब उसकी ही अगर मर्ज़ी नहीं है. – अंकित मौर्या

Ankit Maurya Gazal

जब उसकी ही अगर मर्ज़ी नहीं है..
किसी की फिर यहां चलती नहीं है..

यहां पे मौत भी सस्ती नहीं है..
पियाला है मगर व्हिस्की नहीं है..

ये समझें देख कर दुनिया के ग़म को,
हमारा ग़म अभी कुछ भी नहीं है

मोहब्बत क्लास है जिसमें कभी भी,
ख़याल-ए-यार से छुट्टी नहीं है..

हमारे पास लेे के आइए दिल,
हमारी हुस्न से बनती नहीं है..

नहीं मुमकिन यहां पे ख़ुदकुशी भी
है पंखा तो मगर रस्सी नहीं है

सदा तो दूर नइ है रौशनी भी,
दर-ए-ज़िंदान है खिड़की नहीं है..

Written by अंकित मौर्या

अंकित मौर्या बिहार के शौर्य भूमि भोजपुर जिले के बनाही गांव से आते हैं तथा आरा शहर में पले-बढ़े हैं। वर्तमान में वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा से स्नातक कर रहे हैं। वही से 'राहत इंदौरी' और 'कुमार विश्वास' जैसे पुरोधाओं को प्रत्यक्ष सुनकर इनका रुझान गीत-ग़ज़लों में हुआ और आज स्वयं इस क्षेत्र में बिहार का नाम रौशन कर रहे हैं।

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