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रही मर्जी बस उसकी ही जिसे जैसा बना डाला – अंकित मौर्या

Ankit Maurya Gazals

रही मर्जी बस उसकी ही जिसे जैसा बना डाला
कभी जो ताज था सिर का उसे कासा बना डाला

किसी के हिस्से में अाई है हरियाली ही हरियाली
किसी के हिस्से सहरा और बस सहरा बना डाला

बनाई भी ज़मीं उसने तो इक जैसी नहीं ये भी
कहीं सहरा कहीं जंगल कहीं दरिया बना डाला

बनाने वाले के हाथों की है कारीगरी ये सब
ज़मीं पे भी कोई चेहरा ख़ुदा जैसा बना डाला

हम ऐसों को बना कर के ख़ुदा उकता गया था फिर
तिरी आंखें बना डाली तिरा चेहरा बना डाला

बनाना था उसे दरिया संभाले एक साहिल को
तो इक तुझ सा बना डाला फिर इक मुझ सा बना डाला

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Written by अंकित मौर्या

अंकित मौर्या बिहार के शौर्य भूमि भोजपुर जिले के बनाही गांव से आते हैं तथा आरा शहर में पले-बढ़े हैं। वर्तमान में वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा से स्नातक कर रहे हैं। वही से 'राहत इंदौरी' और 'कुमार विश्वास' जैसे पुरोधाओं को प्रत्यक्ष सुनकर इनका रुझान गीत-ग़ज़लों में हुआ और आज स्वयं इस क्षेत्र में बिहार का नाम रौशन कर रहे हैं।

Ankit Maurya Gazals

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