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Poem on Bihar – दुनिया से पहले बिहार घूमते हैं…

Bihar Poem in Hindi

Poem on Bihar in Hindiदुनिया से पहले बिहार घूमते हैं. इस कविता को Shamपा जी ने लिखा है, अगर आप Shamपा जी को नहीं जानते तो आप इनके इंस्टाग्राम पर जाके इनके पेज को फॉलो कर सकते है. तो कविता की शुरुआत कुछ इस तरह से होता है,

की मुझे जनवरी पसंद हैं, तुम्हे अगस्त
मुझे कॉफी पसंद है, तुम्हे चाय
मुझे रुकना पसंद है, तुम्हे घूमना
मुझे पहाड़ पसंद है, तुम्हे नदियाँ
मुझे अपना बिहार पसंद है, तुम्हें दुनिया

Poem on Bihar in Hindi
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इस पसंद नापसंद के चक्कर में हमें दूर होना जरूरी है क्या?

एक शहर रोहतास ढूंढा हैं, जहाँ पहाड़ भी है और नदियाँ भी इस शहर में रुकना भी घूमने सा हैं।
झील किनारे तुम्हारी चाय अगस्त सी खामोशी और मेरी कॉफी जनवरी सा सुकून देगी।
दुनिया से पहले अपना राज्य घूमते हैं, जिला शहर और अपना गांव घूमते हैं।

सुबह और शामें एक से ही हैं, नदी और झरने एक से ही हैं।
लोग और अपने एक से ही हैं, साथी और सपने एक से ही हैं।
हम और तुम एक से ही हैं, मुझे तुम पसंद हो तुम्हे ‘मैं’
चलो फिर दुनिया से पहले अपना राज्य घूमते हैं, जिला शहर और अपना गांव घूमते हैं।
जो हैं जैसा है बस साथ-साथ घूमते है. साथ-साथ घूमते हैं।

इसे भी पढ़ सकते हैं: Bihar Hu Mai – बिहार हूँ मैं – बिहारवासियों के लिए समर्पित

Shamपा जी आशा करती है की ये कविता आपको जरूर पसंद आया होगा। अगर आपको ये ‘Poem on Bihar – दुनिया से पहले बिहार घूमते हैं’ कविता दिल से पसंद आ ही गया है तो फिर देरी किस बात की है दोस्तों और परिवारों में इस कविता को शेयर कीजिये।

Written by साहित्य जर्नल

 हमारा प्रयास साहित्य के विभिन्न रूपों को साहित्य जर्नल के माध्यम से जनता तक पहुँचाना और नए उभरते लेखकों को प्रोत्साहित करना है।

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