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हम बिहार तो छोड़ आये, पर बिहारीपन नहीं भूलें।

Bihar Par Kavita Hindi

Poem on Bihar: नमस्ते दोस्तों, आपलोग जानते है की बिहार का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास को पढ़कर, इसे बखूबी समझा जा सकता है। और अनेक लेखकों और कलाकारों ने अपने अपने तरीको से बिहार को दर्शाने का प्रयास किया है। इसी तरह से हमारा एक और प्रयाश “Poem on Bihar in Hindi”, Hindi Poem on Bihar”, “Bihar Par Kavita In Hindi”, में लेकर आये हैं। आप लोग इसे पढ़े और अपनी सुझाव कमेंट में दें।


Poem on Bihar State
Poem on Bihar State

गांव की गलियों में गुजरा अभी बचपन नहीं भूलें।
हम बिहार तो छोड़ आये, पर बिहारीपन नहीं भूलें।।

भाषा की मिठास और रिश्तों का अपमान नहीं भूलें।
हम बिहार तो छोड़ आये, पर बिहारीपन नहीं भूलें।।

नये मकान में आकर भी हम वो आंगन नहीं भूलें।
हम बिहार तो छोड़ आये, पर बिहारीपन नहीं भूलें।।

वो मेला हाट, वो कोशी घाट, और अल्हड़ पानी नहीं भूले।
हम बिहार तो छोड़ आये, पर बिहारीपन नहीं भूलें।।

गिल्ली डंडा और कुस्ती का वो फन नहीं भूले।
हम बिहार तो छोड़ आये, पर बिहारीपन नहीं भूलें।।

भूलना था बहुत आसान पर हम आदतन नहीं भूलें।
हम बिहार तो छोड़ आये, पर बिहारीपन नहीं भूलें।।

हाँ, हम बिहार तो छोड़ आये, पर बिहारीपन नहीं भूलें।।

लेखक: अज्ञात

इस पोस्ट को भी देखे: Bihar Hu Mai – बिहार हूँ मैं – बिहारवासियों के लिए समर्पित

Hindi Poem on Biharहम बिहार तो छोड़ आये, पर बिहारीपन नहीं भूलें।” ये कविता आपको कैसा लगा और साथ ही कोई सवाल या सुझाव हो तो निचे कमेंट में जरूर बताएं।

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